आज के समय में RO का पानी पीना एक प्रचलन है और शायद की ऐसा कोई घर हो जहाँ इसका इस्तेमाल ना होता हो . अगर हम सफ़र में भी जाते है तो डिब्बा बंद पानी लेना पसंद करते है और उसी का सेवन करते है।

हमें बताया गया है की नोर्मल water जो हमें चापाकल या Pipe से मिलता है वो दूषित है जिसे पीने से हम कई तरह के बीमारियों के शिकार हो सकते हैं , RO का पानी याडिब्बा बंद पानीसुरक्षित है

पर अगर ऐसा सच में है तो सरकार क्यूँ लगवाना चाहती है RO पे ban ?

तो इस पोस्ट में हम थोड़ा डिटेल में बात करेंगे हमारे पीने के पानी के बारे में , हमारी सेहत के बारे में , की क्या बड़ी बड़ी कम्पनियां RO के नाम पे हमारे फैमिली के हेल्थ के साथ खिलवाड़ कर रही थीं ? क्या उनका मक़सद सिर्फ़ पैसे बनाना था ? येसरकारी निर्देशअब क्यूँ आया है ? तो चलिए शुरु करते हैं

RO क्यों use हो रहा है ?

बढ़ती pollution के वजह से हमने खुद ही अपने पीने के पानी को गंदा का दिया है जमीन से निकलने वाला भी काफी दूषित है जिसे हम सीधे पीने के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकते क्योंकि इससे बीमारियां होने का खतरा है। पानी की इस समस्या को दूर करने के लिए घर में RO सिस्टम लगाए जाते है जो पानी की साफ़ करके उसे पीने लायक बनाते है।

ये सिस्टम दूषित पानी वाले इलाकों में आर्सेनिक और फ्लोराइड, टॉक्सिन्स, बैक्टीरिया, वायरस, रासायनिक तत्वों अघुलनशीन लवणों और पेस्टीसाइड्स जैसे खतरनाक पदार्थों को हटाने में काफी काम आता है। बिना किसी रसायन इस्तेमाल किए प्राकृतिक रूप से पानी को साफ करता है।

Companies का कहना है की “RO TDS LEVEL को बिलकुल कम कर देता है , और साफ़ पानी देता है

ये TDS क्या होता है ?

आसान शब्दों में कहें तो यह पानी में घुलनशील खनिज को ही TDS कहा जाता है।

पानी में अकार्बनिक पदार्थ जैसे कैल्शियम, मैग्नेशियम, पोटैशियम, सोडियम, क्लोराइड और सल्फेट्स आदि पाए जाते हैं और कुछ मात्रा में कार्बनिक पदार्थ भी होते हैं।

पानी में इन खनिजों की एक निश्चित मात्रा तक उपस्थिति स्वास्थ के लिए आवश्यक है। लेकिन एक स्तर से ज़्यादा ये नुक़सानदायक है।

टीडीएस का उपयोग पानी की शुद्धता को जांचने के लिए किया जाता है। इसके माध्यम से पता लगाया जाता है कि पानी शुद्ध है या नहीं और पीने योग्य है या नहीं।

तो, RO सिस्टम TDS को कम करता है और खतरनाक पदार्थों को हटाकर हमेंसिर्फ़ साफ़पानी देता है

RO से नुकसान क्या हैं ?

पानी में प्राकृतिक रूप से कुछ महत्वपूर्ण तत्व मौजूद होते हैं। इनको दो भागो में रखा जाता है, एक गुड मिनरल्स और दूसरे बैड मिनरल्स। पहले श्रेणी वाले मिनरल्स में केल्शियम, मैग्नीशियम,पोटाशियम जैसे तत्व शामिल होते हैं। जो हैल्दी रहने के लिए बहुत जरूरी है।

इसके दूसरी तरफ बैड मिनरल्स में लेड,आर्सेनिक,बेरियम, एल्‍यूमीनियम आदि शामिल होते हैं। जब आरओ पानी को प्यूरीफाई करता है तो इसके साथ गुड और बैड दोनो तरह के तत्व भी साफ हो जाते हैं। पानी तो साफ हो जाता है लेकिन गुड और बैड दोनो मिनरल्स भी पानी से खत्म हो जाते हैं। साथ ही, पानी में भरपूर मात्रा में एंटीओक्सिडेंट होते है जो की हमारे शरीर को आलस से मुक्त करते है और शरीर में ऊर्जा का संचार करते है .

लेकिन RO के पानी में ये एंटी ओक्सिडेंट लगभग खत्म हो जाते है और जो पानी पीने पर हमें ऊर्जा मिलनी चाहिये वो नहीं पाती और हम आलस और थकान से भर जाते है .

WHO यानी की वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन का कहना है की आज के समय में लगभग बीमारियां गन्दा पानी पीने की वजह से होती है और उससे भी अधिक बीमारियां RO का पानी पीने की वजह से होती है . तो चलिए हम नज़र डालते हैं कुछ न्यूज़ आर्टिकल पे ,

 

ro ban indiadew gov

 

 

 

 

अब हम जानेंगे की RO किन लोगों को लगवाना ज़रूरी है और पानी को साफ़ करने के लिए RO के अलावा क्या टेक्नॉलजी है जो हमें साफ़ के साथ साथ मिनरल युक्त पानी दे सके ?

सरकार के निर्देसनुसार अगर पानी में TDS level 500 से कम है तो RO Use करना ज़रूरी नही है

एनजीटी के निर्देश पर नैशनल एन्वॉयरनमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टिट्यूट (Neeri), सेंट्रल पलूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) और IIT-Delhi ने आरओ के इस्तेमाल पर एक रिपोर्ट तैयार कर एनजीटी को सौंपी है। रिपोर्ट के आधार पर एनजीटी ने 28 मई को पर्यावरण मंत्रालय को जारी निर्देश में ये बातें कही हैं:

देश में 16 करोड़ 30 लाख लोग ऐसे हैं, जिन्हें पीने के लिए साफ पानी नहीं मिलता। यह संख्या पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा है।

विकसित देशों में भी आरओ का इस्तेमाल कम करने पर जोर दिया जाता है। वहां समंदर के पानी को पीने लायक बनाने के लिए आरओ इस्तेमाल होता है क्योंकि इस पानी में TDS बहुत होता है। वहीं भारत में मौजूद पानी में टीडीएस की मात्रा कम होने के बावजूद आरओ की डिमांड दिन दिन बढ़ रही है।

आरओ सिस्टम बनाने वाली कंपनियों ने पानी को लेकर लोगों में डर का माहौल बना दिया है।

घरों में सप्लाई होने वाले पानी में अगर TDS 500mg/लीटर से कम है तो RO को बैन कर देना चाहिए।

आरओ सिस्टम से पानी में मौजूद जरूरी मिनरल्स भी पूरी तरह निकल जाते हैं। विदेशों में आरओ के बुरे असर देखे जा रहे हैं। वहां के लोगों में कैल्शियम और मैग्निशियम की कमी होने की शिकायत आने लगी है। इसलिए भारत में आरओ सिस्टम बनाने वाली कंपनियां यह ध्यान रखें कि पानी में कम से कम 150mg/लीटर टीडीएस जरूर मौजूद रहे

आरओ से पानी साफ होने की प्रक्रिया में अमूमन 80 फीसदी पानी बर्बाद हो जाता है और 20 फीसदी ही पीने लायक मिलता है। आरओ कंपनियों को ऐसी मशीन बनाने के लिए कहा जाए, जिसके द्वारा कम से कम 60 फीसदी पानी पीने लायक बने और 40 फीसदी से ज्यादा पानी बर्बाद हो। वहीं साफ पानी प्राप्त करने की क्षमता को आगे कम से कम 75 फीसदी तक बढ़ाई जाए।

साथ ही , वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन द्वारा बताया गया है की RO वजह से पानी में मौजूद कैल्शियम पूरी तरह से नष्ट हो जाता है और कैल्शियम हमारे शरीर के लिए सबसे उपयोगी और जरूरी पोषक तत्व है , खासकर हमारे हड्डियों के लिए . इसके सेवन से हड्डियों में आये दिन कमजोरी आने लगती है क्योकि कैल्शियम नहीं मिल पाता और साथ साथ हड्डियों में दर्द और एंठन शुरू हो जाता है जो की धीरे धीरे एक गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है .

ये तो  100% सच है की हमारा पानी अब दूषित हो चुका है और हमें पानी को शुद्ध करके ही पीना चाहिए तो RO Technology के अलावा हमारे पास क्या option है ?

हमारी कम्पनी INDIADEW इन सभी बातों को ध्यान में रखकर ऐसी टेक्नॉलजी में आधारित मशीन बनाती है जो हमेंमिनरल युक्त साफ़ पानीदेती है इस मशीन को FDA, RoHS ETC और साथ ही Government से अप्रूवल मिला हुआ है साथ ही इस मशीन का इस्तेमाल Indian ARMY ने किया है इस मशीन को चलने के लिए बिजली की आवश्यकता नही होती है और साथ ही ये मशीन ऐल्कलायन पानी देती है जो सेहत के काफ़ी अच्छा माना जाता है।

तो चलिए देखते हैं क्या ख़ास है इस मशीन में ?

  • ये मशीन पानी के बर्बादी नही करता
  • इसे बिजली कीआवश्यकता नही होती
  • यह मिनरल युक्त पानी देता है
  • यह ऐल्कलायन पानी देता है
  • रख रखाव पे ख़र्च नही है।

तो जब आप मात्र 7990 की क़ीमत में एक ऐसा Water Purifier ख़रीद सकते हैं वो आपको देता है ऐल्कलायन पानी वो भी बिना बिजली के तो महँगे RO के पीछे ज़्यादा पैसे ख़र्च कर अपनी और अपनी फ़ैमिली के सेहत के साथ समझौता क्यों करना?

INDIADEW Water Purifiers के Product बारे में और जानने के लिए यहाँ click करें।


10 Comments

P P Kochgaway · December 19, 2019 at 11:00 am

What about bacteria and fungus?

    Admin · January 16, 2020 at 10:55 am

    Dear Sir, as you know that the size of Bacteria ranges from 0.2 to 2.0 Microns and the pore size of IndiaDew perifiers are 0.01 micron , which DOES NOT allow bacteria to pass through. Please feel free to call us on 1800 123 1936 or 73199 41597 for any query.

Prem Kumar · January 4, 2020 at 3:20 pm

Looking for better products

    Admin · January 16, 2020 at 10:54 am

    Hello Prem, Please share your Contact Number so that we can help you Or call us 1800 123 1936 .

      Sameer Kumar · February 5, 2020 at 1:02 pm

      How it convert normal neutral water into alkaline water???

        Admin · February 6, 2020 at 6:58 am

        The purifier has a good quality alkaline filter, which has magnesium ball, which when gets in contact of water increases the PH of water making it alkaline.

      Pankaj · February 21, 2020 at 9:47 am

      Water purifier required

        Admin · February 21, 2020 at 12:56 pm

        Please share your Contact Number so that we can help you Or call us 1800 123 1936 .

Satyendra Sinha · February 5, 2020 at 7:05 am

Well,I am eager to know,how you make different from R.O purifier.

    Admin · February 6, 2020 at 6:58 am

    Our purifier does not waste water, uses no electricty, and does not remove any essential minerals whereas RO technology wastes 60 to75% of water.needs electricity and removes everything good or bad. For any other query please feel free to contact us on our toll free no 1800 123 1936.

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